“ढुलू महतो एक क्रांति आजादी के बाद की”

ढुलू महतो का जन्म 12 मई 1975 को धनबाद जिले के एक छोटे से गांव चिटाही मे साधारण परिवार मे हुआ ।इनके पिता का नाम पुना महतो तथा माता का नाम रूकवा महताईन।इनके पिता महेशपुर कोलियरी मे मजदूर के पद पर कार्यरत थे तथा माता मजदूरी किया करती थी । इनकी शादी बोकारो जिले एक साधारण परिवार हुई । ढुलू महतो भाइयो मे सबसे छोटे तथा पिता के लाडले थे।बचपन से ही समाज के लिए कुछ करना चाहते थे इसलिए बचपन मे शरारती के साथ जिद्दी थे और जिस चीज को चाह लेते थे उसे पूरा कर के ही रहते थे ।बचपन मे इनका जीवन बड़ा कष्टमय रहा ।इनकी प्रारम्भिक शिक्षा उत्क्रमित विद्यालय टुंडु मे तथा।इंटर की पढाई डीएवी इंटर कॉलेज कतरास से पूरी की ।आर्थिक स्थिति अच्छी नही रहने के कारण बीच मे पढाई लिखाई छोड़नी पड़ी और सेल मजदूरी जोगीडीह कोलियरी मे करने लगे वहां पर हो रहे मजदूरो के अत्याचार को दुर करने की ठान ली और फिर अत्याचार को खत्म करने के साथ मजदूरो को उनका हक दिलाया।इनकी चर्चा चारो ओर बढऩे लगी लोग जुड़ने कर लोगो के कष्ट दूर करने लगे ।1999 ई. मे पहली बार इनकी मुलाकात समरेश सिंह से हुई और समरेश सिंह इनसे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने 2000 ई. मे टाईगर की उपाधि दी और इन्होने टाईगर फोर्स का गठन किया ।इस बीच इन्होने कई बार कठिनाईयो का सामना करना पड़ा।2005 ई.मे पहली बार इन्हें झारखंड वनांचल कांग्रेस से पार्टी ने टिकट दिया, इस चुनाव मे इन्होंने 25000 वोटो के साथ तीसरे स्थान पर रहे लेकिन इन्होंने बाघमारा मे अपना प्रभाव छोड दिया हर जगह इनकी ही चर्चा होने लगी इनकी रैली देख अच्छे अच्छे नेताओ के होश उड गये।इसके बाद भी इन्होनें हार नही मानी और लोगो से उनके सुख दुख बांटे।कहावत तो सूने ही होंगे भगवान के घर देर है पर अंधेर नही ।2009 ई.मे इन्हे बाबूलाल मरांडी ने अपने पार्टी से टिकट दिया । इस बार इन्होंने 56026 वोट लाकर सिर्फ जीत दर्ज नही की बल्कि सारे रिकॉर्ड तोड दिये, इनके प्रतिद्वंदी जलेश्वर महतो को 36066 वोट पे संतुष्ट करना पड़ा और अपने क्षेत्र से पहली बार नवनिर्वाचित विधायक के रूप में चुने गए ।इसके बाद इन्होंने अपने क्षेत्र के बहुत सारे परेशानीयो झेल रहे लोगे के परेशानी दूर किये तथा उनके साथ हाथ से हाथ मिलाकर काम करने लगे ।बाघमारा मे विकास की लहर दौडने लगी हर जगह इनकी चर्चा होने लगी सायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था इनके विरोधी अंदर ही अंदर षडयंत्र रचने लगे और इन्हें एक झूठे आरोप मे फसां दिया ग्यारह महीने तक इन्हे जेल मे रखा गया ,जब ये जेल से बाहर निकले तो इनके चाहनेवाले की इतनी भीड़ थी कि लोग जेल गेट के दिवारो पे चढ गये सिर्फ इन्हें देखने के लिए जमीन मे तो पाव रखने की जगह नही थी जेल गेट से लेकर रणधीर वर्मा चौक तक हर जगह जाम तथा इनके निकलते ही इनकी जयजयकार होने लगी चारो तरफ ढुलू महतो जिंदाबाद और जेल का ताला टूट गया ढुलू महतो छुट गया के नारे गूंजने लगे ।इसी बीच जेल के दौरान कई पार्टीयो ने इनसे मुलाकात की और अपनी पार्टी से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर दिया लेकिन इन्होंने सारे ऑफर ठुकरा दिये क्योंकि ये नही चाहते थे कि हमारी परेशानी आम जनता को झेलनी पड़े। जेल से निकलने के बाद इन्होनें जनता के परेशानीयो को दुर किया और काफी लोकप्रिय हो गए ।कुछ महीने बाद भारतीय जनता पार्टी मे शामिल हो गए और 2014 मे भारतीय जनता पार्टी ने इन्हें अपने पार्टी से टिकट दिया ।इस चुनाव मे इन्होंने 86603 वोटो के साथ अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड दिये और फिर इस बार इनके प्रतिद्वंदी जलेश्वर महतो 56980 वोट लाकर हार का सामना करना पड़ा । बहुत सालो के बाद बाघमारा मे विधायक के रूप में ढुलू महतो ने अपनी जीत के साथ कमल फूल खिलाये

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